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  आठ आने के राम-जानकी                               सब राम-जानकी ही हैं...वहां अरबों वाले राम-जानकी...बाकी जगह आठ आने के राम जानकी हैं...लोग भव्यता के पीछे भाग रहे हैं ... भगवान को तो पीछे छोड़ दिया है...धर्म पर ही ध्यान दिया...जनता पर किसी का ध्यान कहां है...सब के अंदर डर पैदा है कि आगे गाड़ी कैसे चलेगी...   यहां आस्था रहती है... ईशवर पर..राम पर.. जानकी पर... हर भगवान पर ... जो यहां कि हर गली के हर मंदिर में विराजमान है... यही है राजा दशरथ की अयोध्या नगरी... यहां राम की पेढ़ी पर हर साल लाखों दिये जलते है...दीपावली पर... पर यह अयोध्या की पूरी कहानी नही है...   यहां..इसी अयोध्या की गलियों में सैकड़ो मंदिर है...जो जर जर हालत में हैं...जहां कभी राम भजन हुआ करता था... श्रधालू आया करते थे...कुआं था.. जिससे लोगों और जानवरों...मतलब हर अयोध्यावासी राम भक्त की प्यास बुझा करती थी...पर अब ये भी सूख गया है...इन मंदिरों के पुजारी अब भगवान भरोसे हैं...क्योंकी अब कोई राम भक्त यहां आता नही..सारी भक्ती ...